सूदखोरों के जाल में फंसा पूर्व भाजपा विधायक केशरदेव बाबर का बेटा दिनेश एक वर्ष से घर नहीं आया। सूदखोरों ने तीन से तीस रुपए सैकड़ा का ब्याज लगाकर उससे डेढ़ करोड़ से ज्यादा रुपए हड़प लिए। खाली चेक, स्टाम्प ही नहीं कई जमीनों की रजिस्ट्री भी सूदखोरों ने अपने नाम करवा ली। इसके बाद भी सूद का पैसा पूरा नहीं होने पर दिनेश बिना बताए ही घर से चला गया। बाबर ने बीते फरवरी माह में पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार के समक्ष परिवाद पेश कर बेटे को सूदखोरों से बचाने की गुहार की थी। परिवाद में सूदखोरी से जुड़े 18 जनों के नाम भी बताए गए थे। इसके बाद सूदखोरों पर पुलिस ने शिकंजा कसा तो विधायक का बेटा लौट आया। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। हालांकि पुलिस अभी तक इस मामले की पूरी तस्वीर साफ नहीं कर सकी है।
सट्टे ने बनाया कर्जदार
पूर्व विधायक बाबर की ओर से पेश परिवाद के अनुसार सूदखोर गिरोह के लोगों ने बेटे दिनेश को अधिक धन कमाने का लालच देकर जुआ-सट़्टे के कारोबार में धकेल दिया। पहले तो उसे इस धंधे में फायदा पहुंचाया, फिर कर्जदार बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद दिनेश इस दलदल में फंसता गया। सूद चुकाने के लिए एक करोड़ 39 लाख का लोन सूदखोरों का हिसाब करने के लिए पूर्व विधायक केशरदेव बाबर ने बैंक से एक करोड़ 39 लाख रुपए का लोन लिया। इसके अलावा अपने स्तर पर भी लाखों रुपए की व्यवस्था कर इन्हें दिए। इसके बाद भी सूदखोरों ने दिनेश से जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। खाली चेक, प्रोमेसरी नोट और स्टाम्पों पर हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद भी हिसाब पूरा नहीं होने पर दिनेश पर दबाब बनाया गया। जिससे वह मानसिक अवसाद में आ गया। बाद में इन लोगों ने दिनेश से मारपीट कर भयभीत कर दिया। इससे एक वर्ष पूर्व वह घर छोड़कर चला गया। परिवाद में आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अवैध रूप से वसूल किया गया धन संपत्ति वापस दिलवाने की मांग की गई है।
Comments
Post a Comment