मन भ्रमित, किसे दूँ, क्या करूँ?
हर अपना सा लगता है, पर वादा सपना सा लगता है |
कभी पार्टी, कभी कोई व्यक्तित्व तो कभी कोई अपना, अपनी ओर खींचता सा लगता है |
मन कहीं, तन कहीं तो उमंग कहीं, उन्हें कोई सींचता सा लगता है |
मन भ्रमित, किसे दूँ, क्या करूँ?
बजरंग लाल सैनी गुरु
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