रुक रुक के चलता हूँ मैं
पता नही क्योँ
अपने आप से जलता हूँ मैं
पता नही क्योँ
अपने ख्वाबों से मिलता हूँ मै
पता नही क्योँ
कुछ ख्वाब खुद सिलता हूँ मै
पता नही क्योँ
कभी नहीँदुःख में ढलता हूँ मैं
पता नही क्यों
मैं तो बस एक मौन शब्द हूँ
कभी कभी आंसू की तरह ढलता हूँ
पता नही क्योँ
मेरी मौना एक नीरव रव है
इसी में जीवन ढूंढता हूँ मैं
पता नहीँ क्यों?
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