इश्क

आज मेरे दिल ने मुझे अपना बना लिया
आज मेरे ख्वाबों ने अपना आशियाना बना लिया
उसके दहकते लबों ने नाम मेरा सजा लिया
शर्मीले सजल नयनों ने उसके हमें अपनी पलकों पर सजा लिया
क्या बताएँ उनकी उस अदा का कि वो कहना चाहकर भी ना कह पाए
एक हम थे जो वो ना कह पाए उसे अपना मुकद्दर बना लिया
गुलिस्तां -ए-जन्नत-ए-महकश की बू मे डूबी उनकी शख्सीयत
को हमने अपने आईना -ए-दिल 💘 में बसा लिया

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